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कांग्रेस ने किया किसानो के साथ धोखा|

आज कल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी पिछले कुछ दिनों से किसानो पर काफी तेज राजनीति कर रहे हे, इसी बिच हम लेकर आये कांग्रेस शासित राज्य से कुछ तथ्य ढूंढ़कर तो कृपया इन्हे पूरा पढ़े| 


हर चमकती चीज सोना होती हे यह बोल कर कांग्रेस ने 3 राज्यों में सरकार बना ली पर दुख इस बात का हे की इस देश की जनता और किसान कभी कांग्रेस की इस चाल को नहीं समझ पा रही है,सबको मालूम हे की कांग्रेस के पास न तो ऐसा कोई चहेरा जो मोदी का सामना कर सके और नहीं कोई मुद्दा हे जिस के दम पर कांग्रेस बीजेपी को टक्कर दे सके| इस लिया कांग्रेस सिर्फ किसानो के नाम का इस्तमाल कर सत्ता का सुख चाहती है, अगर आप पुराने और नया आंकड़ों को ध्यान से देखोगे तो पता चेलगा की कांग्रेस ने हमेशा देश के साथ खिलवाड़ किया है| 
अभी सम्पन्न हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने जिस प्रकार से मध्यप्रेदश,राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसानों का कर्जा माफ करने की बात कही थी, वो कर भी दिया। जो की राहुल गाँधी हमेशा ट्वीट कर के हमेशा इसका ढोल पीटते है। परंतु इसकी सच्चाई एक उदाहरण से देखिए। 


मध्यप्रदेश 
अभी कांग्रेस द्वारा विजय मध्य प्रदेश की स्थिति ज़रा देखिये। मध्य प्रदेश के गुना में खाद न मिलने पर जब विरोध किया तो उन पर पुलिस की लाठिया बर्षा कर भगा दिया गया। मध्यप्रदेश की इस किसान हितेषी सरकार ने खाद मांगने पर लाठीया बरसाई है। तुच्छ लाभ के लिए लंबे भविष्य से खिलवाड़ करना मध्य प्रदेश के किसानो और जनता को अब भारी पड़ रहा है। खासकर किसान भाइयों को और भी भारी पड़ा है।  इसके साथ ही खाद के दाम भी बढ़ा दिया गए। 1250 की डीएपी 1400 रुपए की हुई, अन्य खाद के दाम में भी 10% से 50 % तक बढ़ोतरी हुई है। 
कर्नाटक
आप दूसरी और कर्नाटक की तरफ भी दिखे वहां लोन माफी की छुपी हुई शर्तें अब सामने आ रही है। इन शर्तों के अनुसार जो किसान 50,000 से अधिक का कर्जा लिए हैं और मूल धन जून 2018 तक चुकता कर सकते हैं, उन्हीं का कर्ज़ माफ होगा। इसके साथ ही पशु भाग्य, मध्यम और लंबे अवधि ऋण तथा गैर-कृषि के क्षेत्र के आने वाले किसानों का कर्जा माफ नहीं होगा। इसके साथ ही 20 जून, 2017 तक लिए हुए लघु अवधि कर्ज़ ही कर्ज़माफी कि श्रेणी में आते हैं।अधिक से अधिक 5% या उस से भी काम किसानो को इसका लाभ मिलेगा। वादा सभी किसानों से किया, मगर कर्ज़ माफ किया तो केवल 5% किसानों का, और साथ ही किसानों की आत्महत्याओं की खबरें भी कांग्रेस ने दबा दी। जिस कर्नाटक में राहुल गाँधी कर्ज़माफी का दावा कर रहे थे उसी कर्नाटक के ही बागलकोट में हम्पन्ना हूगार (56 वर्ष) नामक किसान ने आत्महत्या कर ली क्योंकि उसके सिर पर कर्ज़ का बोझ था। अब तक करीब 250 किसानों ने कर्ज़ के चलते आत्महत्या कर ली है।


राजस्थान 
पिछले 4  दिन से राजस्थान के बारां में किसान यूरिया लेने कार्यालय जाते हैं, और बदले में पुलिस की लाठियां और शरीर पर जख्म ले कर वापस आते हैं क्योंकि वहा लायने बहुत लम्बी हो गए हे जब पूरा दिन लाइन में लगे रहने पर भी खाद नहीं मिलती हे तो किसानो का सब्र बोल उठता है। इसके विरोध में किसान वहां प्रदर्शन भी कर रहे हैं। जिस यूरिया की कभी कमी नही हुई, वो आज राशन की तरह बेचा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस यूरिया को नीम-कोटिंग कर बचाया था, जिस पर किसानों का अधिकार था, उस यूरिया को अब बेचा जा रहा है और किसान सड़कों पर लाठी खा रहा है।



पंजाब 
भले ही आप पंजाब में देख ले यहां पर बहुत से किसानों का तो वीडियो भी वायरल हो गया है जो आपबीती सुनते नहीं थकते हे। पंजाब के किसान सतनाम सिंह ने अपना दर्द का एक वीडियो सांझा करते हुए कहा कि चुनावों से पहले हमें उम्मीद थी कि कांग्रेस आएगी तो हमारा कर्जा माफ होगा, लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। पंजाब की अमरिंदर सरकार ने चुनावों के समय सबका कर्जा मार करने की बात कही थी, लेकिन जब चुनाव जीते तो उसमें विभिन्न शर्ते लगा दी। यही काम इन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों के साथ भी किया। इनके पास कर्ज़माफी की कोई नीति नहीं है। 

ऐसे कितने ही वीडियो हैं जिनको आप देखेंगे तो समझ पाएंगे कि आखिर किस प्रकार कांग्रेस ने देश के किसानों और नोजवानौ को फंसा रखा है। कर्जमाफी का लड्डू लेकर कांग्रेस द्वारा हर राज्य में जिस प्रकार बांटा जा रहा है वो दिखाता है कि उसके पास कोई नीति नहीं है। किसानों की कर्ज़माफी की जो बात कही गयी वो धरातल पर नहीं उतर सकी|
कुछ राहुल गाँधी के ट्वीट देखे- 


कांग्रेस ने इसी प्रकार के खेलो से पिछले 70 सालो से देश पर राज किया था| इस खेल को आप आसानी से समझ नहीं सकते हैं। इसी एक खेल का उदाहरण देखिये। NDTV की तथाकथित पत्रकार सुनेत्रा चौहान ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने बताया कि किसानों की आत्महत्याओं में 38% का इजाफा हुआ है जो 2014 के आंकड़ों से दुगना है।
यह आँकड़ें देते हुए उन्होंने NCRB की बात कही। दरअसल जब आप किसी एक खेल का हिस्सा होते हैं, तो आप चाहें जितना भी खुद को अलग दिखाने का प्रयास करें, आपके अंदर उस एक इकोसिस्टम के लक्षण नजर आ ही जाते हैं। सुनेत्रा चौहान के अंदर भी वो नज़र आ गए। उनके द्वारा दी हुई जानकारी पूरी तरह से फ़र्ज़ी निकली है। किसानों की आत्महत्याओं पर यदि नज़र डालें तो हम पाएंगे कि UPA शासनकाल में किसानों ने अधिक आत्महत्याएं की हैं. 2004 में 18241, 2005 में 17131, 2006 में 17060, 2007 में 16632 और 2008 के अंदर 16796 आत्महत्याएं दर्ज हुई हैं। इसका मतलब की UPA - I के शासनकाल में कुल 85860 किसानों ने आत्महत्याएं की थी। अब UPA - II को देखते हैं। साल 2009 में 17368, 2010 में 15964, 2011 में 14027, 2012 में 13754, और 2013 में 11772 किसानों ने आत्महत्या की थी। कुल 72,885 किसान आत्महत्या कर गए थे। 2008 में किसानों की कर्ज़ माफी के बाद आत्महत्याओं में ज़्यादा तेज़ी दिखी। यह चिंताजनक स्थिति थी, मगर सत्ताधीशों ने सुध न ली। अब देखिए कि 2016 में 11370 किसानों से आत्महत्या की थी जो पिछले 15 साल में सबसे कम थी। यह तब था जब लगातार UPA शासनकाल में आत्महत्याओं की संख्या लगातार बढ़ रही थी। अब हम यह नहीं कह सकते हैं कि किसानों के सारे मसले सुलझा दिए गए हैं लेकिन फिर भी बहुत कुछ उनके लिए किया गया है। तो सुनेत्रा चौहान को 38% का इज़ाफ़ा कहाँ से दिख गया?


सोचें कि यह किसानों के साथ कितना बड़ा धोखा है? इतना बड़ा छल वो भी देश के अन्नदाता से? क्या यह करने से पहले शर्म नहीं आयी? सवाल ज़रूर पूछियेगा।
देश के किसानो से बस इतना ही कहना है कि पंजाब, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के आपके किसानो की आवाज़ सुनें। समझें कि कौन आपको छल रहा है। देश आपके बिना आगे नहीं बढ़ सकता है।
इसे शेयर करे ताकि हर कोई देश के बारे में कांग्रेस की इस सच्चाई को जान सकते हे

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