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सरदार उधम सिंह

सरदार उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के एक गाँव के सिख किसान परिवार सरदार टहल सिंह के यहाँ हुआ था|
sardar udham singh
Sardar Udham Singh 


  इन्होंने अपने माता पिता को बचपन में ही खो दिया था, उनेक पिता जम्मू कश्मीर में एक रेलव क्रॉसिंग पर चौकीदार थे |उन्होंने अपना बाकि का बचपन अमृतसर के एक अनाथालय में बिताया, जहा से उन्होंने 1918 में मेट्रिक पास कर के 1919 में अनाथालय को छोड़ दिया| 

महात्मा गाँधी ने रोलेट एक्ट की विरोध में देश व्यापी हड़ताल का आहन किया| जिस पर पंजाब की जनता ने भरी प्रतिक्रिया दी और गिरफ्तारिओ के विरोध में प्रदर्शन करने अमृतसर के जलियावाला बाग में लगभग १०,००० लोग  इकठ्ठा हुए वहा पर सरदार उधम सिंह आंदोलन कार्यो की सेवा करने आये हुए थे| जिससे उस समय पंजाब राज्यपाल माइकल ओ डायर घबरा गए| तथा उसने ब्रिगेडियर जेनेरल रेजिनाल्ड डायर के नेतृतव में सेनिको को भेजा था| डायर के निर्देश पर सैनिकों ने निकासद्वार को रोक दिया था,  और उन पर गोलिया चलाने  का आदेश दिया लोगो ने वहा पर स्थित कुओ में कूदकर तथा दीवार कूदकर जान बचाने के कोशिश की| 

रिपोर्ट के अनुसार उस हत्याकांड में लगभग 1800 लोग की को मोत के घाट उतर दिया गया| जिस का उधम सिंह पर गहरा प्रभाव पड़ा, वे उस नरसंसार के लिए माइकल ओ डायर को जिम्मेदार मानते थे| इन सब के कारण वह क्रन्तिकारी गतिविधिओ में भाग लेने लगे और भगत सिंह का उनके मन गहरा प्रभाव पड़ा तथा उन्होंने 1924 को गदर पार्टी  को ज्वाइन कर लिया| 

1927  को उनके खिलाफ मुकदमा चला कर उन्हें 5 साल की कैद की सजा दी गयी जिन्हे वापस 1931 में रिहा कर दिया गया उन्हें कुछ दिनों तक साधारण जीवन जीने को पुलिस के सामने दिखावा करते  रहे और फिर 1933  कश्मीर  रस्ते जर्मनी भागने में कामयाब हुए वहा से 1934 में लन्दन पहुंचे इंजीनयर का काम शुरू किया| जहां उन्होंने रिवॉल्वर खरीद ली और सही समय का इंतजार करने लगे| 

1940 मे कैक्स्टन हॉल मे सेंट्रल ऐशया सोसायटी और ईस्ट इंडिया एसोसियन  बैठक थी जहा माइकल ओ डायर भी आये थे|

उन्होंने ने सही समय सोचकर एक किताब में बन्दुक छुपाकर उस हॉल मे घुस गए और जैसे  बैठक समाप्त हुई उन्होंने रिवॉल्वर निकल कर ओ  डायर पर गोली चला दी| सिंह भागने की बजाय वही खड़े रहे और गिरफ़्तारी दी जिन्हे मोत की सजा सुनाई गयी| उधम सिंह को 31 जुलाई 1940 को पाटनविल जेल में फांसी दे दी गयी|

सरदार  उधम सिंह our जी का नाम भारत के इतिहास में अमर हो गया हे| सत्र 1974 उधम सिंह जी की अस्थियो को सम्मान पूर्वक लाया गया जिन्हे अमृतसर के जलियावाला बाग में सुरक्षित रखा गया है| 

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